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Showing posts from June, 2023

क्या क़ुरआन (नाऊज़ोबिल्लाह)मुहम्मद साहब द्वारा रचित ग्रंथ है?

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नहीं, क़ुरआन मुहम्मद साहब द्वारा रचित ग्रंथ नहीं है। क़ुरआन इस्लामी धर्म का पवित्र ग्रंथ है और मुस्लिम समुदाय की मान्यताओं के अनुसार, यह अल्लाह (ईश्वर ) के माध्यम से प्रकटित हुआ है। मुहम्मद साहब को इस्लामी विश्वास मानने वाले मुसलमानों का प्रमुख प्रेरक मानते हैं, लेकिन वह क़ुरआन के लेखक नहीं हैं। मुहम्मद साहब के विषय में मान्यता है कि उन्हें अल्लाह के द्वारा दिए गयी आकाशवाणी  के माध्यम से क़ुरआन की प्राप्ति हुई थी।  क़ुरआन को अल्लाह के माध्यम से आकाशवाणी के द्वारा अवतरित हुआ माना जाता है, जिसे मुहम्मद साहब ने अपने जीवनकाल में प्राप्त किया। यह घटना मुसलमान समुदाय के धार्मिक अनुयायों के बीच प्रमुख तथ्य मानी जाती है। कुरान के अवतरण का पूर्ण विवरण इस प्रकार है: जब मुहम्मद साहब 40 वर्ष के थे, वह हिरा नामक गुफ़ा में जाकर एकांत में ईश्वर की स्तुति वंदना किया करते थे। एक दिन उन्हें गुफ़ा में अचानक एक आकाशीय दृश्य दिखाई दिया। इस दृश्य में उनके सामने मानव के रूप में दिखाई देने वाले  अल्लाह के अल्लाह के देवदूत गैब्रिएल थे, जिन्होंने उन्हें पढ़ने के लिए आह्वानित किया। पर मुहम्मद साहब ...

क्या क़ुरआन (नाऊज़ोबिल्लाह)मुहम्मद साहब द्वारा रचित ग्रंथ है?

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नहीं, क़ुरआन मुहम्मद साहब द्वारा रचित ग्रंथ नहीं है। क़ुरआन इस्लामी धर्म का पवित्र ग्रंथ है और मुस्लिम समुदाय की मान्यताओं के अनुसार, यह अल्लाह (ईश्वर ) के माध्यम से प्रकटित हुआ है। मुहम्मद साहब को इस्लामी विश्वास मानने वाले मुसलमानों का प्रमुख प्रेरक मानते हैं, लेकिन वह क़ुरआन के लेखक नहीं हैं। मुहम्मद साहब के विषय में मान्यता है कि उन्हें अल्लाह के द्वारा दिए गयी आकाशवाणी  के माध्यम से क़ुरआन की प्राप्ति हुई थी।  क़ुरआन को अल्लाह के माध्यम से आकाशवाणी के द्वारा अवतरित हुआ माना जाता है, जिसे मुहम्मद साहब ने अपने जीवनकाल में प्राप्त किया। यह घटना मुसलमान समुदाय के धार्मिक अनुयायों के बीच प्रमुख तथ्य मानी जाती है। कुरान के अवतरण का पूर्ण विवरण इस प्रकार है: जब मुहम्मद साहब 40 वर्ष के थे, वह हिरा नामक गुफ़ा में जाकर एकांत में ईश्वर की स्तुति वंदना किया करते थे। एक दिन उन्हें गुफ़ा में अचानक एक आकाशीय दृश्य दिखाई दिया। इस दृश्य में उनके सामने मानव के रूप में दिखाई देने वाले  अल्लाह के अल्लाह के देवदूत गैब्रिएल थे, जिन्होंने उन्हें पढ़ने के लिए आह्वानित किया। पर मुहम्मद साहब ...

क्या इस्लामी शरिया कानून विश्व को इस्लामिक खिलाफत में बदलने की मुस्लिम साजिश का हिस्सा है?

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यदि देखा जाए तो विश्व के अधिकतर देश  शरिया कानून पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने की वकालत कर रहे हैं। हमें यह स्पष्ट करना होगा कि शरिया क्या है और क्या नहीं है?यह कोई एसा क़ानून नहीं है जिसकी सार्वभौमिक महत्ता सिद्ध हो सके या ऐसा क़ानून जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के विषय में विचार किया जा सके। शब्द "शरिया" के अंतर्गत सम्मिलित  है-"शरह से सम्बंधित" अर्थात धर्म से सम्बंधित। अर्थात यह क़ानून केवल उन ही लोगो पर लागू किया जा सकता है जो मुस्लिम हो। यह क़ानून किसी भी ग़ैर मुस्लिम पर लागू किया ही नहीं जा सकता।   "शरिया" शब्द से जुड़े अलग-अलग नियम और कानून इस्लामी न्यायशास्त्र पर सैकड़ों वर्षों की विद्वतापूर्ण बहस के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। परंपरागत रूप से शरिया के अंतर्गत उन क़ानूनों को शामिल किया गया है जो मुसलमानो की  प्रार्थना के समय, दान देने के सिद्धांतों और तलाक प्रक्रियाओं जैसे प्रमुख धार्मिक मुद्दों से सम्बंधित होते हैं। धार्मिक आधार पर सही क्या है , ग़लत क्या है इन सब की जानकारी हमें शरिया क़ानून से प्राप्त होती है।  इसलिए धर्म की सही ...