क्या क़ुरआन (नाऊज़ोबिल्लाह)मुहम्मद साहब द्वारा रचित ग्रंथ है?
The religion of Islam is supposed to be the religion of terror and horror but the fact is just reverse of it. The purpose behind this Blog is to show people the real face of Islam. Advent of Islam is linked with a noble purpose that is to stop terrorism and maintain peace in the region. Islam has never been against any religion. Thanks!
यदि देखा जाए तो विश्व के अधिकतर देश शरिया कानून पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने की वकालत कर रहे हैं। हमें यह स्पष्ट करना होगा कि शरिया क्या है और क्या नहीं है?यह कोई एसा क़ानून नहीं है जिसकी सार्वभौमिक महत्ता सिद्ध हो सके या ऐसा क़ानून जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के विषय में विचार किया जा सके। शब्द "शरिया" के अंतर्गत सम्मिलित है-"शरह से सम्बंधित" अर्थात धर्म से सम्बंधित। अर्थात यह क़ानून केवल उन ही लोगो पर लागू किया जा सकता है जो मुस्लिम हो। यह क़ानून किसी भी ग़ैर मुस्लिम पर लागू किया ही नहीं जा सकता। "शरिया" शब्द से जुड़े अलग-अलग नियम और कानून इस्लामी न्यायशास्त्र पर सैकड़ों वर्षों की विद्वतापूर्ण बहस के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। परंपरागत रूप से शरिया के अंतर्गत उन क़ानूनों को शामिल किया गया है जो मुसलमानो की प्रार्थना के समय, दान देने के सिद्धांतों और तलाक प्रक्रियाओं जैसे प्रमुख धार्मिक मुद्दों से सम्बंधित होते हैं। धार्मिक आधार पर सही क्या है , ग़लत क्या है इन सब की जानकारी हमें शरिया क़ानून से प्राप्त होती है। इसलिए धर्म की सही समझ उत्पन्न करने के लिए शरिया क़ानूनों की जानकारी बेहद ज़रूरी है। उदाहरणार्थ- आपसी सहमति से क़ाएम किये गए शारीरिक सम्बन्धो पर भारतीय क़ानून के अंतर्गत दण्डित नहीं किया जा सकता। पर शरिया क़ानून की जानकारी के पश्चात् ही इस अनैतिक कृत्य की भयावतः का पता चल सकता है। इस्लामी शरिया क़ानून के अंतर्गत इस तथ्य का स्पष्ट उल्लेख मौजूद है की अनैतिक सम्बन्ध ईश्वर की दृष्टि में अक्षम्य अपराध की श्रेणी में निहित हैं। इस प्रकार शरिया क़ानून के लागू न होने के बावजूद भी इस क़ानून के अस्तित्व में होने के कारण ही एक मुस्लिम अनैतिक कृत्यों में लिप्त होने से स्वयं को बचा सकता है। इस प्रकार देखा जाए तो वैश्विक स्तर पर शरिया क़ानून की उपस्तिथि मात्र किसी के लिए भी खतरा उत्पन्न नहीं करती बल्कि इसकी उपस्तिथि तो धर्म विशेष के लोगों को नैतिकता की ओर ही प्रवित्त करती है।
यदि देखा जाए तो इस्लामी शरिया कानून इस्लामी मानदंडों और परंपराओं का एक बड़ा संग्रह है जो दैनिक इस्लामी प्रथाओं का मार्गदर्शन करता है। सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि शरिया कानून की महत्ता मुसलमानो के प्रार्थना और उपवास जैसे व्यक्तिगत धार्मिक मामलों तक ही सीमित है, न कि राष्ट्रीय कानूनों के साथ एसे किसी भी क़ानून का कोई सामंजस्य स्थापित हो सकता है। जैसे-लगभग सभी मुसलमान कानून का समर्थन करते हैं और शरिया को निजी दायरे में छोड़ना पसंद करेंगे।
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